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चंडीगढ़

सेवइयों की मिठास और गले मिलकर दूर हुई दूरियां

संवाददाता ग्रामीण तहकीकात

हरिद्वार/नई दिल्ली। एक महीने के मुकद्दस रमजान और कठिन इबादत के बाद आज पूरे देश में ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे अकीदत और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह की पहली किरण के साथ ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों का सैलाब उमड़ पड़ा। हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर राजधानी दिल्ली की जामा मस्जिद तक, हर तरफ ‘ईद मुबारक’ की गूंज और आपसी भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

नमाज के बाद मुल्क की खुशहाली के लिए उठे हाथ

आज सुबह ईदगाहों में हजारों की संख्या में मुस्लिम भाइयों ने सफों में खड़े होकर एक साथ नमाज अदा की। नमाज के बाद इमाम साहब ने मुल्क में अमन, चैन, शांति और तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी। नमाज संपन्न होते ही लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। बच्चों में ‘ईदी’ को लेकर विशेष उत्साह देखा गया, वहीं मेलों में खिलौनों और झूलों का आनंद लेने के लिए भारी भीड़ जुटी।

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: नवरात्रि और ईद एक साथ

इस बार की ईद बेहद खास है क्योंकि एक तरफ चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और दूसरी तरफ ईद की खुशियां मनाई जा रही हैं। हरिद्वार, रुड़की और झबरेड़ा क्षेत्र में यह नजारा हमारी साझा संस्कृति (गंगा-जमुनी तहजीब) का प्रतीक बना। हिंदू भाइयों ने ईदगाहों के बाहर पहुंचकर मुस्लिम भाइयों का स्वागत किया और गले मिलकर उन्हें बधाई दी। यह दृश्य बताता है कि भारत की एकता ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।

सेवइयों की मिठास और दावतों का दौर

ईद के मौके पर घरों में सुबह से ही विशेष पकवान और ‘शीर-खुरमा’ (सेवइयां) बनाने का दौर जारी है। मेहमानों का स्वागत मिठास के साथ किया जा रहा है। मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि यह त्योहार हमें सिखाता है कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है और आपसी प्रेम ही समाज की सबसे बड़ी पूंजी है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

त्योहार के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। ड्रोन कैमरों से भी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की गई। प्रशासन ने शांतिपूर्ण तरीके से नमाज संपन्न होने पर सभी को धन्यवाद दिया और बधाई दी।

 

हरिद्वार। “या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता…” के जयघोष के साथ आज चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है। आज का दिन आदि-शक्ति के ‘माँ चंद्रघंटा’ स्वरूप को समर्पित है। देवी का यह रूप जितना सौम्य और शांत है, उतना ही शत्रुओं के लिए संहारक भी। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जो शीतलता और शांति का प्रतीक है।

देवी का स्वरूप: शांति और वीरता का अद्भुत संगम

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप अलौकिक है। स्वर्ण जैसी चमक वाली देवी दस भुजाओं वाली हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और धनुष-बाण हैं, जो अधर्म के विनाश का संकेत देते हैं। उनका वाहन सिंह है, जो साहस का प्रतीक है। देवी की आराधना करने से साधक के भीतर छिपे हुए भय का नाश होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

आज के दिन का विशेष महत्व (21 मार्च 2026)

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जो भक्त आज के दिन मणिपुर चक्र पर ध्यान केंद्रित करते हैं, उन्हें सिद्धियां प्राप्त होती हैं। माँ चंद्रघंटा की पूजा से न केवल आध्यात्मिक बल मिलता है, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व में एक विशेष आकर्षण और विनम्रता का समावेश होता है।

पूजा की सरल विधि और आज का ‘महा-उपाय’

  • शुभ रंग: आज के दिन ग्रे (स्लेटी) या चमकीले रंगों का प्रयोग करना फलदायी होता है।
  • महा-भोग: माँ को दूध की खीर या केसरिया पेड़ा अर्पित करें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-शांति आती है।
  • दान का महत्व: आज के दिन ब्राह्मणों या कन्याओं को शक्कर या दूध का दान करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

मंत्र जो बदल देगा आपकी किस्मत

आज पूजा के समय इस प्रभावशाली मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए:

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः

माँ का संदेश: निर्भय बनें और धर्म का मार्ग चुनें

प्रधानाध्यापक और विद्वानों का मानना है कि माँ चंद्रघंटा का घंटा असुरों के हृदय को कपाने वाला है। इसका अर्थ यह है कि समाज में व्याप्त बुराइयों और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए हमें जागरूक और साहसी होना चाहिए। माँ की कृपा उन पर सदैव रहती है जो दूसरों के प्रति दयालु और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हैं।

विशेष संपादकीय | ग्रामीण तहकीकात

भूमिका:

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन माँ दुर्गा के ‘ब्रह्मचारिणी’ स्वरूप को समर्पित है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। यह स्वरूप केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच अडिग रहने और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले ‘घोर परिश्रम’ का जीवंत उदाहरण है।

1. माँ का दिव्य स्वरूप और कथा

​दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण किए हुए माँ ब्रह्मचारिणी अत्यंत शांत और भव्य दिखती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए देवी ने हजारों वर्षों तक केवल फल-फूल खाकर और अंत में केवल वायु पर रहकर तपस्या की थी।

सीख: जीवन में बड़ी सफलता (जैसे शक्ति और धन) पाने के लिए ‘शॉर्टकट’ नहीं, बल्कि ‘तप’ (कठिन परिश्रम) की आवश्यकता होती है।

 

2. पूजा की सरल विधि (घर और मंदिर के लिए)

  • पवित्रता: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्वच्छ वस्त्र (पीले या सफेद रंग के) धारण करें।
  • अभिषेक: माँ को पंचामृत से स्नान कराएं और चंदन का तिलक लगाएं।
  • प्रिय पुष्प: माता को सफेद सुगंधित फूल (मोगरा या चमेली) अत्यंत प्रिय हैं।
  • महाप्रसाद: माँ ब्रह्मचारिणी को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि इससे लंबी आयु और सौभाग्य का वरदान मिलता है।
  • सिद्ध मंत्र: > दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

3. व्रत और आहार: शरीर और मन का शुद्धिकरण

​नवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर विजय पाना है।

  • सात्विक भोजन: कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरी, साबूदाना खिचड़ी और सेंधा नमक का प्रयोग करें।
  • तरल आहार: गर्मी का समय है, इसलिए नारियल पानी, छाछ और ताजे फलों के रस का अधिक सेवन करें।
  • क्या न करें: मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का त्याग करें। साथ ही, किसी की निंदा या क्रोध करने से बचें।

4. आज के दौर में महत्व

​आज के दौर में माँ ब्रह्मचारिणी का संदेश बहुत प्रासंगिक है। चाहे आप एक पत्रकार हों, किसान हों या व्यापारी—बिना ‘संयम’ और ‘अनुशासन’ के कोई भी युद्ध नहीं जीता जा सकता। कठिन परिस्थितियों में विचलित न होना ही माँ की सच्ची आराधना है।

‘ग्रामीण तहकीकात’ परिवार की ओर से समस्त पाठकों को द्वितीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

चैत्र नवरात्र: CM नायब सैनी ने पत्नी संग माता मनसा देवी के दरबार में टेका मत्था, हरियाणा की खुशहाली के लिए मांगी दुआ

पंचकूला | चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपनी धर्मपत्नी सुमन सैनी के साथ पंचकूला स्थित सुप्रसिद्ध माता मनसा देवी मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने महामाई के चरणों में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

हवन-यज्ञ और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

शक्तिपीठ में मत्था टेकने के बाद मुख्यमंत्री मंदिर परिसर की यज्ञशाला पहुंचे, जहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन-यज्ञ में आहुति डाली। भक्ति के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने सामाजिक संदेश भी दिया; उन्होंने मंदिर परिसर में पौधरोपण कर प्रदेशवासियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।

मंदिर का बदलेगा स्वरूप: कॉरिडोर और लिफ्ट की सुविधा

मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी साझा की। उन्होंने बताया कि माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड द्वारा भव्य विकास कार्य कराए जा रहे हैं:

  • नया कॉरिडोर: मंदिर को भव्य रूप देने के लिए कॉरिडोर का निर्माण जारी है, जिसमें बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधा होगी।
  • संस्कृत महाविद्यालय: परिसर में बन रहे नए संस्कृत कॉलेज के भवन का काम अंतिम चरण में है।
  • जीर्णोद्धार: कालका की काली माता मंदिर और चंडी माता मंदिर का भी सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

“नवरात्र हमारी समृद्ध संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक हैं। माता मनसा देवी करोड़ों भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। मेरी प्रार्थना है कि हमारा हरियाणा प्रगति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।” — नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री

रक्तदाताओं का बढ़ाया उत्साह

धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मुख्यमंत्री ने जिला रेडक्रॉस सोसाइटी और शिव कांवड़ महासंघ द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर का दौरा किया। उन्होंने रक्तदाताओं को बैज लगाकर उनका हौसला बढ़ाया और इस मानवीय कार्य की सराहना की।

इन दिग्गजों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड के मुख्य प्रशासक सतपाल शर्मा ने मुख्यमंत्री को माता की तस्वीर और हिंदू नववर्ष का कैलेंडर भेंट किया। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया, मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे और उपायुक्त निशा यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।