
ग्रामीण तहकीकात संवाददाता
रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन की जल सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रसिद्ध शोध पत्रिका ‘थियोरेटिकल एंड एप्लाइड क्लाइमेटोलॉजी’ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, 21वीं सदी के अंत तक क्षेत्र के तापमान में भारी बढ़ोतरी के चलते भूजल पुनर्भरण (ग्राउंडवाटर रिचार्ज) में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ सकती है और कुल जल उपलब्धता 4 से 7 प्रतिशत तक घट सकती है। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि बढ़ते तापमान और वाष्पीकरण में वृद्धि के कारण भविष्य में कुमाऊं क्षेत्र में भीषण सूखा, प्राकृतिक जलस्रोतों का सूखना और कृषि व पेयजल का संकट गहरा सकता है। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत और जी.बी. पंत संस्थान के निदेशक डॉ. आई.डी. भट्ट ने जल संकट से निपटने के लिए जलागम प्रबंधन, प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनरुद्धार और वैज्ञानिक जल संरक्षण नीतियों को तत्काल लागू करने की जरूरत बताई है।
