ग्रामीण तहकीकात संवाददाता

हरिद्वार। जनपद में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सुदृढ़ करने और विभागों के बीच आपसी समन्वय को परखने के उद्देश्य से बुधवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशन में पांच अलग-अलग संवेदनशील स्थलों पर सफलतापूर्वक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस अभ्यास के दौरान हरकी पैड़ी क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने, श्रद्धालुओं में भगदड़ मचने, मनसा देवी पैदल मार्ग पर वनाग्नि, लक्सर के गंगदासपुर में तटबंध टूटने और रुड़की में बाढ़ के कारण लोगों के बहने जैसे बनावटी परिदृश्य (डेमो) तैयार किए गए, जिसकी सूचना सुबह 10:20 बजे मिलते ही जिला प्रशासन का ‘इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम’ (आईआरएस) पूरी तरह सक्रिय हो गया। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पी.आर. चौहान की निगरानी में तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारियों को इंसीडेंट कमांडर नामित कर पुलिस, अग्निशमन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की टीमों को तत्काल राहत कार्य हेतु रवाना किया गया, जिन्होंने मलबे में दबे और नदी में बहे लोगों को सुरक्षित निकालकर त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराई। इस महत्वपूर्ण अभ्यास के दौरान जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी, अर्थ एवं संख्याधिकारी नलिनी ध्यानी सहित तमाम उच्चाधिकारी तैनात रहे, वहीं रुड़की में संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ व एसडीएम अनिल शुक्ला और हरिद्वार में एसडीएम जितेन्द्र कुमार ने फील्ड में कमान संभालते हुए राहत कार्यों को मानकों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से संपन्न कराया।

