विशेष रिपोर्ट – ग्रामीण तहकीकात
हरिद्वार। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जन समस्याओं के निस्तारण में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता को वास्तविक राहत देने वाला होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 15 दिन के भीतर लंबित सभी शिकायतों का हर हाल में समाधान सुनिश्चित किया जाए।
लापरवाह अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
बैठक में विभागवार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने पाया कि एल-1 (L1) स्तर पर 429 और एल-2 (L2) स्तर पर 103 शिकायतें अभी भी लंबित हैं। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिन विभागों के पास 10 से अधिक शिकायतें हैं, वे शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निस्तारण की गुणवत्ता में कमी पाई गई या लापरवाही उजागर हुई, तो संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
इन विभागों को मिला सख्त अल्टीमेटम
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से निम्नलिखित विभागों को लंबित मामलों को तत्काल निपटाने के निर्देश दिए:
- पुलिस विभाग और नगर निगम
- यूपीसीएल (विद्युत विभाग) और जल संस्थान
- राजस्व, भू-अभिलेख और खाद्य आपूर्ति विभाग
- सिंचाई एवं उत्तराखंड पेयजल निगम
डीएम ने यूपीसीएल के अधिकारियों को बिजली संबंधी समस्याओं पर सीधे कॉल कर फीडबैक लेने और प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने को कहा।
नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान
नगर निकायों और नगर निगम को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छता, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन प्रशासन के लिए जनता का फीडबैक है, जिससे शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी कार्यप्रणाली स्थापित की जा सकती है।

बैठक में ये रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, सचिव एचआरडीए मनीष कुमार, एसडीएम जितेंद्र कुमार, एसडीएम रुड़की अनिल कुमार शुक्ला, जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश सहित सभी खंड विकास अधिकारी और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी उपस्थित रहे।
