RNI/PRGI पंजीकरण के बिना रौब झाड़ने वालों के खिलाफ मुख्यधारा का मीडिया एकजुट; पुलिस-प्रशासन से विशेष सत्यापन अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की मांग
नवीन कुमार विशेष संपादकीय रिपोर्ट
रुड़की (ग्रामीण तहकीकात)। आजकल क्षेत्र में बिना किसी सरकारी कागजात, RNI/PRGI पंजीकरण या सूचना विभाग की मान्यता के केवल एक फेसबुक पेज बनाकर, बाजार से माइक आईडी खरीदकर और साथ में एक लड़के को कैमरामैन बनाकर खुद को बड़ा पत्रकार बताने वालों की होड़ सी मच गई है; सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों को खबर की एक लाइन तक लिखना नहीं आता और जिनका पुराना रिकॉर्ड थानों में लड़ाई-झगड़ों व चालानों से भरा रहा है, वे भी अधिकारियों (डीएम,एसएसपी) के साथ अपनी फेसबुक पर उनकी फोटो साथ में डालकर और गाड़ियों पर ‘प्रेस’ लिखवाकर आम लोगों, छोटे दुकानदारों व कर्मचारियों पर बेवजह रौब झाड़ते फिरते हैं।
इतना ही नहीं, अब फर्जीवाड़े का एक नया तरीका सामने आया है जहाँ बिना किसी वैध RNI/PRGI रजिस्ट्रेशन के ‘चैट जीपीटी’ (ChatGPT) जैसे एआई टूल का इस्तेमाल करके फर्जी अखबारों के पन्नों की कटिंग तैयार की जा रही है और खुद को फर्जी संपादक घोषित कर जनता में भ्रम फैलाया जा रहा है; ऐसे डिजिटल जालसाजों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है और क्षेत्र के पंजीकृत एवं असली अखबारों के संपादक जल्द ही इन फर्जी एआई संपादकों के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं।
यहाँ यह बात बिल्कुल साफ और स्पष्ट कर देना जरूरी है कि हमारी यह रिपोर्ट उन आदरणीय वरिष्ठ पत्रकारों के लिए बिल्कुल नहीं है जो पिछले कई सालों से बड़े अखबारों और न्यूज़ चैनलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं तथा आज पूरी ईमानदारी व प्रोफेशनल तरीके से अपने न्यूज़ पोर्टल चला रहे हैं; यह ‘तथाकथित’ शब्द केवल उन अनधिकृत तत्वों के लिए है जिन्हें पत्रकारिता की एबीसीडी तक नहीं पता और जो केवल वसूली व रौब जमाने के लिए मैदान में उतरे हैं। इस पूरे खेल में सबसे बड़ी लापरवाही उन पेज चलाने वालों और गैर-जिम्मेदार संपादकों की भी है जो बिना पुलिस वेरिफिकेशन या पढ़ाई-लिखाई देखे किसी के भी हाथ में आईडी कार्ड और माइक थमा देते हैं; यहाँ कानून की नजर से यह बात सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली है कि अगर कोई इंसान एक बार वरिष्ठ पत्रकारों के सामने अपनी गलती मानकर लिखित में ‘माफीनामा’ दे चुका हो और फिर भी बार-बार वही काम करे, तो कानून में इसे जानबूझकर की गई बदनियती माना जाता है और पुराना माफीनामा कोर्ट-पुलिस में उसके खिलाफ सबसे पक्का सबूत बन जाता है। कानूनी जानकारों का साफ कहना है कि बिना जांच-पड़ताल कार्ड बांटने वालों और बार-बार नियम तोड़ने वालों पर अब सख्त गाज गिरने वाली है, क्योंकि पुलिस और प्रशासन से यह मांग की जा रही है कि वे जल्द ही क्षेत्र में ऐसे फर्जी माइक, गाड़ियों पर लिखे ‘प्रेस’, चैट जीपीटी से बनी फर्जी अखबार कटिंग और बिना मान्यता वाले पेजों की जांच का विशेष अभियान चलाकर सख्त वैधानिक कार्रवाई करें ताकि सही और असली मीडिया की साख पूरी तरह बनी रहे।
