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झबरेड़ा

 

ग्रामीण तहकीकात 

झबरेड़ा। कस्बे और आसपास के देहात क्षेत्रों में इन दिनों मेडिकल स्टोरों के नाम पर नियम-कानूनों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय चर्चाओं की मानें तो क्षेत्र के लगभग 90 फीसदी मेडिकल स्टोर बिना किसी फार्मासिस्ट के ही राम-भरोसे चल रहे हैं, जबकि कानूनन बिना फार्मासिस्ट के दवा की पुड़िया देना भी अपराध है। आलम यह है कि कई दुकानों पर न तो जीवन रक्षक दवाओं को बचाने के लिए फ्रिज चालू हैं और न ही सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरों का अता-पता है। हद तो तब हो गई जब थोक लाइसेंस की आड़ में कई धड़ल्ले से फुटकर दवाइयां बेच रहे हैं और कुछ जगहों पर तो बिना किसी वैध डिग्री के पशुओं की दवाइयां भी खपाई जा रही हैं। जब इस पूरे गोरखधंधे को लेकर ड्रग इंस्पेक्टर हरीश सिंह से बात की गई, तो साहब ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “मेरे संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं है, आप लिखकर शिकायत दो तब मैं कार्रवाई करूँगा।” अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी तंत्र को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए भी किसी के लिखकर देने का इंतजार है? शासनादेश तो यह कहता है कि ड्रग इंस्पेक्टर का काम खुद फील्ड में उतरकर औचक निरीक्षण करना और गलत को रोकना है। एक सजग पत्रकार का काम व्यवस्था की पोल खोलना है, न कि विभाग के लिए शिकायतकर्ता बनकर कचहरी के चक्कर काटना। अब क्षेत्र की जनता यह देख रही है कि नवनियुक्त ड्रग इंस्पेक्टर साहब कब अपनी कुर्सी छोड़कर इन मनबढ़ संचालकों पर डंडा चलाते हैं या फिर लिखित शिकायत के बहाने मामले को ठंडे बस्ते में ही डाले रखते हैं।

नसीरपुर अफजलपुर की माटी से निकलकर अब झबरेड़ा विधानसभा में ‘परिवर्तन’ की मशाल थामने को तैयार आदेश कुमार

झबरेड़ा/मंगलौर। राजनीति में जब कोई व्यक्तित्व संघर्ष की भट्टी में तपकर निकलता है, तो उसकी चमक दूर तक दिखाई देती है। मंगलौर के नसीरपुर अफजलपुर गांव से अपनी राजनैतिक पारी शुरू करने वाले आदेश कुमार अब झबरेड़ा विधानसभा के दंगल में ‘मजबूत दावेदार’ के रूप में ताल ठोक चुके हैं। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए आदेश कुमार ने अभी से क्षेत्र के गांव-गांव और गली-मोहल्लों में डेरा डाल दिया है। उनकी इस सक्रियता ने झबरेड़ा की राजनैतिक बिसात पर हलचल पैदा कर दी है।

किसानों और गरीबों की बुलंद आवाज

आदेश कुमार की राजनीति का मूल मंत्र ‘जनसेवा’ है। वर्तमान में वे झबरेड़ा क्षेत्र के किसानों और गरीबों की सबसे मुखर आवाज बनकर उभरे हैं। खाद-बीज की समस्या हो या बिजली-पानी का संकट, आदेश कुमार हर मोर्चे पर आम आदमी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आ रहे हैं। क्षेत्र की जनता के बीच उनकी बढ़ती पैठ का ही नतीजा है कि आज लोग उन्हें ‘भविष्य के विकल्प’ के रूप में देखने लगे हैं।

2027 के लिए ‘हाथ’ को करेंगे मजबूत

राजनैतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से टिकट की दौड़ में आदेश कुमार का नाम सबसे आगे है। युवा कांग्रेस के साथ सालों का अनुभव और प्रदेश महासचिव (अनुसूचित मोर्चा) के पद पर रहते हुए पूरे प्रदेश में बनाई गई अपनी पकड़ के दम पर वे झबरेड़ा में कांग्रेस के लिए ‘तुरुप का इक्का’ साबित हो सकते हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि आदेश कुमार जैसे शिक्षित और बेदाग छवि वाले युवा चेहरे को मैदान में उतारकर पार्टी झबरेड़ा सीट पर बड़ी जीत दर्ज कर सकती है।

 

संघर्षों से बना ‘मार्शल’ का व्यक्तित्व

2009 में लिब्बरहेडी से शुरू हुआ सफर अब एक बड़े मुकाम पर है। युवा कांग्रेस में निर्वाचित अध्यक्षों की हैट्रिक लगाने वाले आदेश कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सरकार में निर्माण सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में प्रशासनिक अनुभव बटोरने वाले आदेश कुमार आज बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की फौज तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के आंसू पोंछने का जरिया है।

झबरेड़ा की जनता अब एक ऐसे प्रतिनिधि की तलाश में है जो उनके बीच का हो, उनकी भाषा बोलता हो और उनके दुख-दर्द को समझता हो। आदेश कुमार की बढ़ती सक्रियता और 2027 की तैयारी ने यह साफ कर दिया है कि इस बार झबरेड़ा का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है।