तनुश्री दत्ता ने बताया बॉलीवुड में ‘मीटिंग’ और ‘तारीफ’ के पीछे का कड़वा सच
मुंबई। भारत में ‘मी टू’ (Me Too) आंदोलन की मशाल जलाने वाली अभिनेत्री तनुश्री दत्ता एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। मनोरंजन जगत की चकाचौंध के पीछे छिपे कड़वे सच को उजागर करते हुए तनुश्री ने नए कलाकारों को आगाह किया है कि यहाँ सपनों के सौदागर किस तरह मासूमों का मानसिक और शारीरिक शोषण करते हैं।
सुंदरता के जाल में फंसाने की साजिश
तनुश्री ने हालिया इंटरव्यू में दावा किया कि इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा ‘लुक्स’ को तवज्जो दी जाती है। उन्होंने कहा कि अक्सर नए कलाकारों की सुंदरता की जरूरत से ज्यादा तारीफ की जाती है ताकि उनका भरोसा जीता जा सके। इसी भरोसे की आड़ में उन्हें ‘खास मीटिंग्स’ के नाम पर गलत लोगों और संदिग्ध जगहों पर भेजा जाता है, जहाँ उनका गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है।
क्या है बॉलीवुड में ‘चॉकलेट’ का असली मतलब?
अभिनेत्री ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इंडस्ट्री के गलियारों में ‘चॉकलेट’ शब्द का इस्तेमाल बड़े सपनों और ऊंची महत्वाकांक्षाओं के लालच के रूप में किया जाता है। उनके अनुसार, जब किसी कलाकार को लगातार प्रशंसा और बड़े स्टार बनाने का झांसा दिया जाता है, तो वे शिकारी के जाल में फंस जाते हैं। तनुश्री ने युवाओं को सलाह दी कि वे केवल तारीफों के पुलिंदों पर भरोसा न करें और अपनी पहचान व गरिमा को प्राथमिकता दें।
उम्मीदों को हथियार बनाते हैं ‘शिकारी’
तनुश्री ने फिल्म जगत की तुलना बचपन की उन नसीहतों से की जहाँ माता-पिता अजनबियों से दूर रहने को कहते थे। उन्होंने कहा, “कुछ लोग कलाकारों की सफलता पाने की तड़प और उनकी उम्मीदों को ही उनके खिलाफ हथियार बना लेते हैं। वे जानते हैं कि एक उभरता हुआ कलाकार काम के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, और इसी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है।”
“काम के लिए जमीर का सौदा मंजूर नहीं”
समझौतावादी राजनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए तनुश्री ने साफ कर दिया कि उनके लिए आत्मसम्मान (Self-Respect) किसी भी बड़े प्रोजेक्ट या फिल्म से बढ़कर है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वह काम पाने के लिए अपनी जिंदगी या उसूलों का सौदा कभी नहीं करेंगी। उन्होंने नए कलाकारों को ‘संयम’ और ‘सजगता’ का मंत्र देते हुए सही-गलत की पहचान करने की अपील की।
