नव संवत्सर 2083 पर भव्य सांस्कृतिक उत्सव
ग्रामीण तहकीकात संवाददाता
नई दिल्ली | दिल्ली सचिवालय का वातावरण गुरुवार को भक्ति और उल्लास के रंगों में सराबोर नजर आया। हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) और चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य और लोक कलाओं के माध्यम से ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की अनूठी झलक पेश की।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: आधुनिकता और परंपरा का संगम
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने प्रदेशवासियों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा:
“सांस्कृतिक राष्ट्रवाद दिल्ली सरकार की नीतियों के केंद्र में है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि हर नागरिक में अपनी गौरवशाली विरासत के प्रति गर्व का भाव जगाना है।”
उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली को एक ऐसी राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है जहाँ आधुनिक विकास और प्राचीन परंपराएं साथ-साथ चलें। ‘भजन क्लबिंग’, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ और विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाने के संकल्प इसी दिशा में बड़े कदम हैं।
कलाकारों ने बांधा समां: ओडिशी से डांडिया तक
सचिवालय में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 25 कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया:
- ओडिशी नृत्य: कलाकारों ने ओडिशी शैली में माँ दुर्गा की भावपूर्ण स्तुति कर वातावरण को आध्यात्मिक बनाया।
- लोक नृत्य नाटिका: माँ भगवती के विभिन्न स्वरूपों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- डांडिया रास: गुजरात के पारंपरिक डांडिया नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह और उमंग भर दी।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
मंत्री कपिल मिश्रा ने जोर देकर कहा कि भारत की असली पहचान उसकी धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक जड़ों में है। ऐसे आयोजनों से न केवल कला को बढ़ावा मिलता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
