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Day: November 5, 2026

• दिल्ली पुलिस और FDA की संयुक्त कार्रवाई, भारी मात्रा में दवाएं व मशीनरी बरामद, दुकान सील

 • साउथ दिल्ली से पकड़े गए 20 हजार के इनामी आरोपी राजेश यादव की निशानदेही पर हुई कार्रवाई

 • पानीपत स्थित दवा फैक्ट्री से झबरेड़ा में शिफ्ट किया गया था माल और मशीनरी

 • दवाओं के भंडारण या संचालन का कोई वैध लाइसेंस नहीं मिला, फॉर्म-17 भरकर लैब भेजे गए नमूने

 

ग्रामीण तहकीकात/नवीन कुमार 

झबरेड़ा। कस्बा झबरेड़ा में नगर पंचायत रोड स्थित एक दुकान पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने देर शाम छापेमारी की। पुलिस रिमांड पर चल रहे ₹20,000 के इनामी अंतरराज्यीय शातिर आरोपी की निशानदेही पर की गई इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया। टीम ने मौके से भारी मात्रा में दवाइयों का स्टॉक और दवा निर्माण/पैकिंग से जुड़े मशीनरी पार्ट्स बरामद कर दुकान को सील कर दिया है।

ड्रग्स इंस्पेक्टर हरीश सिंह ने मौके पर जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस ने कुछ समय पूर्व साउथ एक्स क्षेत्र से एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपी की पहचान जयपुर (राजस्थान) निवासी राजेश यादव के रूप में हुई। पूछताछ एवं पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया था कि उसकी पानीपत (हरियाणा) में एक दवा फैक्ट्री थी और वहां से कुछ माल व मशीनरी पार्ट्स झबरेड़ा में नगर पंचायत रोड स्थित इस दुकान पर शिफ्ट किए गए हैं।

आरोपी की निशानदेही पर जब ड्रग्स विभाग और दिल्ली पुलिस की टीम ने नगर पंचायत रोड स्थित दुकान का शटर खुलवाकर जांच की, तो अंदर भारी मात्रा में दवाइयों के डिब्बे और दवा निर्माण संबंधी मशीनरी के कलपुर्जे रखे मिले। जांच के दौरान मौके पर दवाओं के क्रय-विक्रय, भंडारण अथवा इकाई के संचालन से संबंधित कोई भी वैध ड्रग लाइसेंस या कागजात पेश नहीं किए जा सके।

छापेमारी के दौरान टीम ने मौके पर जब्ती व जांच की विधिवत कागजी कार्रवाई पूरी की। ड्रग्स इंस्पेक्टर ने स्पष्ट किया कि बरामद दवाइयां प्रतिबंधित (नारकोटिक) श्रेणी की नहीं हैं, लेकिन अनाधिकृत रूप से रखी गई थी। दवाइयों की गुणवत्ता परखने और यह जानने के लिए कि दवाएं असली हैं या नकली, नियमानुसार फॉर्म-17 भरकर दवाओं के डिब्बों पर सरकारी लाख की मुहर लगाकर नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। सैंपलिंग प्रक्रिया के बाद टीम ने दुकान के शटर को सील कर दिया।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी राजेश यादव आदतन अपराधी है। उस पर पूर्व में एनडीपीएस एक्ट सहित दो गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से वांछित चल रहा था और उस पर 20,000 रुपए का इनाम घोषित था। ड्रग्स इंस्पेक्टर हरीश सिंह ने कहा कि क्षेत्र में बिना लाइसेंस या अवैध तरीके से दवाओं के कारोबार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

 

 

• पत्रकारिता की साख पर उठे सवाल, 300 रुपये का माइक और 50 रुपये का कार्ड लेकर पत्रकार बनने वालों पर साधा निशाना;

• जल्द पत्रकारों की बैठक बुलाकर सीओ को सौंपा जाएगा ज्ञापन

 

ग्रामीण तहकीकात 
मंगलौर। लक्सर में कथित फर्जी पत्रकारों से जुड़े प्रकरण के बाद अब मंगलौर में भी पत्रकारिता की पहचान और विश्वसनीयता को लेकर हलचल तेज हो गई है। मंगलौर प्रेस क्लब रजि० के अध्यक्ष राहुल सैनी ने इस मामले में खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने अपने फेसबुक पृष्ठ के माध्यम से मंगलौर क्षेत्र में कथित फर्जी और बिना उचित पहचान के पत्रकारिता करने वालों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी इस पोस्ट के बाद स्थानीय पत्रकारिता जगत में भी चर्चा शुरू हो गई है। पोस्ट में पत्रकारिता के नाम पर पहचान का गलत इस्तेमाल करने, बाहरी क्षेत्रों से आकर काम करने वाले व्यक्तियों की संस्थागत संबद्धता की जांच और कथित फर्जी प्रेस कार्ड के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग उठाई गई है।

पत्रकारिता की आड़ में निजी स्वार्थ बर्दाश्त नहीं: राहुल सैनी

राहुल सैनी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसका उद्देश्य समाज की समस्याओं को सामने लाना, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना तथा आम जनता को सच्चाई से रूबरू कराना है। लेकिन जब कोई व्यक्ति इसी सम्मानित पेशे की आड़ में निजी स्वार्थ, दबाव बनाने या अपना प्रभाव जमाने का प्रयास करता है तो इससे पूरी पत्रकार बिरादरी की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का दूसरे क्षेत्र से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन पत्रकारिता के नाम पर काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान, संस्थान से जुड़ाव और कार्यप्रणाली की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

300 रुपये का माइक और 50 रुपये का कार्ड लेकर नहीं बन जाते पत्रकार

मंगलौर के पत्रकारिता जगत में एक और मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर कुछ पत्रकारों का कहना है कि आजकल हाथ में सस्ता माइक, गले में पहचान पत्र और वाहन पर प्रेस लिखवाकर पत्रकारिता की पहचान बनाने का चलन बढ़ रहा है। कुछ मामलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार समाचार कतरनों को वास्तविक अखबार में प्रकाशित खबर की तरह दिखाने और मीडिया संस्थानों के नाम का कथित दुरुपयोग करने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। पत्रकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की पहचान का इस्तेमाल कर किसी पर अनुचित दबाव बनाता है अथवा धन की मांग करता है तो ऐसे मामलों को प्रमाण सहित संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जाना चाहिए। केवल पहचान पत्र या माइक के आधार पर किसी को फर्जी घोषित करने के बजाय उसकी वास्तविक संस्थागत संबद्धता और गतिविधियों की जांच जरूरी है।

मंगलौर में स्थानीय पत्रकारों की होगी बैठक, तैयार होगी आगे की रणनीति

मंगलौर प्रेस क्लब रजि० के अध्यक्ष राहुल सैनी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि जल्द ही मंगलौर के पत्रकारों की एक बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में क्षेत्र में पत्रकारिता के नाम पर सक्रिय व्यक्तियों की पहचान, मीडिया संस्थानों की वास्तविक संबद्धता, प्रेस कार्ड के कथित दुरुपयोग और पत्रकारिता की गरिमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में सहमति बनने के बाद संबंधित अधिकारी, विशेष रूप से सीओ मंगलौर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग उठाने की तैयारी है।

बाहरी होना नहीं, गलत पहचान और कार्यप्रणाली होगी सवालों के घेरे में

मंगलौर के सक्रिय एवं वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि क्षेत्र में पत्रकारिता करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत है, लेकिन पत्रकारिता की आड़ में गलत पहचान बनाकर किसी प्रकार का अनुचित लाभ उठाने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। उनका कहना है कि जो पत्रकार वास्तव में धरातल पर रहकर जनता की समस्याओं को उठाते हैं, अधिकारियों तक आम लोगों की आवाज पहुंचाते हैं और निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं, उनकी प्रतिष्ठा सुरक्षित रहनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को केवल बाहरी क्षेत्र का होने के कारण पत्रकारिता से वंचित नहीं किया जा सकता, लेकिन संस्थान की पहचान और अधिकृत प्रतिनिधित्व की पुष्टि आवश्यक है।

अब प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें

मंगलौर में उठे इस मुद्दे ने पत्रकारिता के नाम पर पहचान पत्र जारी करने और मीडिया संस्थानों की संबद्धता की पुष्टि जैसे विषयों को फिर चर्चा में ला दिया है। सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति गलत प्रेस कार्ड, फर्जी समाचार कतरन या किसी संस्थान के नाम का दुरुपयोग करता है तो उसकी जांच कौन करेगा और जिम्मेदारी किसकी होगी? पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रेस संगठनों, मीडिया संस्थानों और प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी है। अब सबकी निगाहें मंगलौर प्रेस क्लब की प्रस्तावित बैठक और उसके बाद उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। इतना तय है कि पत्रकारिता की आड़ में कथित गलत गतिविधियों के मुद्दे को लेकर मंगलौर में आवाज तेज होने लगी है।

ग्रामीण तहकीकात / नवीन कुमार 

मंगलौर। दीपावली के पावन पर्व पर मंगलौर विधानसभा क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव मुडलाना में आस्था, उत्साह और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। दीपोत्सव के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने गांव स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में 551 दीप प्रज्वलित कर सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण जगमगा उठा। कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता करतार सिंह भड़ाना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत एवं सम्मान किया। इस दौरान आयोजक एवं भाजपा नेता संजय कुमार ने कहा कि मुडलाना में दीपावली के अवसर पर 551 दीप प्रज्वलित करने की परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ गांव में आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और एकजुटता को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि करतार सिंह भड़ाना को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था और उनके कार्यक्रम में पहुंचने से ग्रामीणों में उत्साह रहा। वहीं ग्रामीण एवं युवा आयोजकों ने कहा कि दीपोत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि करतार सिंह भड़ाना क्षेत्र में होने वाले धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते नजर आते हैं और ऐसे कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी को ग्रामीण सराहते हैं। इस अवसर पर ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास, जनसेवा और सामाजिक कार्यों को लेकर अपनी अपेक्षाएं भी उनके सामने रखीं। कार्यक्रम के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक चर्चा देखने को मिली। ग्रामीणों ने करतार सिंह भड़ाना के प्रति समर्थन जताते हुए मंगलौर विधानसभा क्षेत्र से उन्हें चुनाव में सफलता मिलने की कामना की। हालांकि चुनाव को लेकर अंतिम निर्णय मतदाताओं का होगा। कुल मिलाकर मुडलाना का दीपोत्सव धार्मिक परंपरा, सामाजिक एकता और स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के बीच उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।