• पत्रकारिता की साख पर उठे सवाल, 300 रुपये का माइक और 50 रुपये का कार्ड लेकर पत्रकार बनने वालों पर साधा निशाना;
• जल्द पत्रकारों की बैठक बुलाकर सीओ को सौंपा जाएगा ज्ञापन
ग्रामीण तहकीकात
मंगलौर। लक्सर में कथित फर्जी पत्रकारों से जुड़े प्रकरण के बाद अब मंगलौर में भी पत्रकारिता की पहचान और विश्वसनीयता को लेकर हलचल तेज हो गई है। मंगलौर प्रेस क्लब रजि० के अध्यक्ष राहुल सैनी ने इस मामले में खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने अपने फेसबुक पृष्ठ के माध्यम से मंगलौर क्षेत्र में कथित फर्जी और बिना उचित पहचान के पत्रकारिता करने वालों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी इस पोस्ट के बाद स्थानीय पत्रकारिता जगत में भी चर्चा शुरू हो गई है। पोस्ट में पत्रकारिता के नाम पर पहचान का गलत इस्तेमाल करने, बाहरी क्षेत्रों से आकर काम करने वाले व्यक्तियों की संस्थागत संबद्धता की जांच और कथित फर्जी प्रेस कार्ड के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग उठाई गई है।
पत्रकारिता की आड़ में निजी स्वार्थ बर्दाश्त नहीं: राहुल सैनी
राहुल सैनी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसका उद्देश्य समाज की समस्याओं को सामने लाना, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना तथा आम जनता को सच्चाई से रूबरू कराना है। लेकिन जब कोई व्यक्ति इसी सम्मानित पेशे की आड़ में निजी स्वार्थ, दबाव बनाने या अपना प्रभाव जमाने का प्रयास करता है तो इससे पूरी पत्रकार बिरादरी की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का दूसरे क्षेत्र से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन पत्रकारिता के नाम पर काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान, संस्थान से जुड़ाव और कार्यप्रणाली की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
300 रुपये का माइक और 50 रुपये का कार्ड लेकर नहीं बन जाते पत्रकार
मंगलौर के पत्रकारिता जगत में एक और मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर कुछ पत्रकारों का कहना है कि आजकल हाथ में सस्ता माइक, गले में पहचान पत्र और वाहन पर प्रेस लिखवाकर पत्रकारिता की पहचान बनाने का चलन बढ़ रहा है। कुछ मामलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार समाचार कतरनों को वास्तविक अखबार में प्रकाशित खबर की तरह दिखाने और मीडिया संस्थानों के नाम का कथित दुरुपयोग करने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। पत्रकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की पहचान का इस्तेमाल कर किसी पर अनुचित दबाव बनाता है अथवा धन की मांग करता है तो ऐसे मामलों को प्रमाण सहित संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जाना चाहिए। केवल पहचान पत्र या माइक के आधार पर किसी को फर्जी घोषित करने के बजाय उसकी वास्तविक संस्थागत संबद्धता और गतिविधियों की जांच जरूरी है।
मंगलौर में स्थानीय पत्रकारों की होगी बैठक, तैयार होगी आगे की रणनीति
मंगलौर प्रेस क्लब रजि० के अध्यक्ष राहुल सैनी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि जल्द ही मंगलौर के पत्रकारों की एक बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में क्षेत्र में पत्रकारिता के नाम पर सक्रिय व्यक्तियों की पहचान, मीडिया संस्थानों की वास्तविक संबद्धता, प्रेस कार्ड के कथित दुरुपयोग और पत्रकारिता की गरिमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में सहमति बनने के बाद संबंधित अधिकारी, विशेष रूप से सीओ मंगलौर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग उठाने की तैयारी है।
बाहरी होना नहीं, गलत पहचान और कार्यप्रणाली होगी सवालों के घेरे में
मंगलौर के सक्रिय एवं वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि क्षेत्र में पत्रकारिता करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत है, लेकिन पत्रकारिता की आड़ में गलत पहचान बनाकर किसी प्रकार का अनुचित लाभ उठाने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। उनका कहना है कि जो पत्रकार वास्तव में धरातल पर रहकर जनता की समस्याओं को उठाते हैं, अधिकारियों तक आम लोगों की आवाज पहुंचाते हैं और निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं, उनकी प्रतिष्ठा सुरक्षित रहनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को केवल बाहरी क्षेत्र का होने के कारण पत्रकारिता से वंचित नहीं किया जा सकता, लेकिन संस्थान की पहचान और अधिकृत प्रतिनिधित्व की पुष्टि आवश्यक है।
अब प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
मंगलौर में उठे इस मुद्दे ने पत्रकारिता के नाम पर पहचान पत्र जारी करने और मीडिया संस्थानों की संबद्धता की पुष्टि जैसे विषयों को फिर चर्चा में ला दिया है। सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति गलत प्रेस कार्ड, फर्जी समाचार कतरन या किसी संस्थान के नाम का दुरुपयोग करता है तो उसकी जांच कौन करेगा और जिम्मेदारी किसकी होगी? पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रेस संगठनों, मीडिया संस्थानों और प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी है। अब सबकी निगाहें मंगलौर प्रेस क्लब की प्रस्तावित बैठक और उसके बाद उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। इतना तय है कि पत्रकारिता की आड़ में कथित गलत गतिविधियों के मुद्दे को लेकर मंगलौर में आवाज तेज होने लगी है।