
ताले के पीछे संदिग्ध हलचल: मीडिया को देख मची खलबली, बच्चे पेटियां उठाकर कमरों में भागे
बड़ा सवाल: यदि बनती है मोमबत्ती तो क्यों हुआ छिपाने का प्रयास? नियमों को दरकिनार कर संचालन की आशंका
ग्रामीण तहकीकात/विशेष संवाददाता
मंगलौर। मंगलौर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुनसान जंगलों की आड़ में नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर अवैध रूप से बारूद और पटाखों का काम किए जाने की आशंकाएं गहराने लगी हैं। पेड़ों के झुरमुट और वीराने का फायदा उठाकर इस संदिग्ध गतिविधि को अंजाम दिए जाने की चर्चाएं हैं। स्थानीय स्तर पर मिल रही सूचनाओं के आधार पर जब मीडिया टीम ने मौके का रुख किया, तो वहां सामने आई स्थिति ने प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
बाहर ताला, भीतर चल रहा था काम
जंगल के बीच स्थित एक परिसर में बाहर से ताला लटका हुआ था, जबकि भीतर कामकाज बदस्तूर जारी था। मीडिया टीम की भनक लगते ही अंदर अफरा-तफरी मच गई। काम कर रहा एक व्यक्ति आनन-फानन में गेट पर आया और उसने दावा किया कि पहले यहां पटाखों का काम होता था, लेकिन अब केवल मोमबत्तियां बनाई जाती हैं। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परिसर के भीतर से छोटे बच्चे संदिग्ध पेटियों को उठाकर कमरों की ओर भागते और छिपाते दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि वहां केवल सामान्य मोमबत्ती बन रही थी, तो मीडिया को देखते ही अचानक इस कदर हड़बड़ाहट और पेटियां कमरों में समेटने की नौबत क्यों आई?

मासूमों से जोखिम भरा काम, श्रम विभाग बेखबर
सुनसान क्षेत्र के बीच नाबालिग बच्चों की मौजूदगी और उनसे पेटियां उठवाए जाने के दृश्यों ने श्रम विभाग की सतर्कता की पोल खोल दी है। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम के तहत बच्चों से इस तरह के जोखिम भरे और संदिग्ध परिसरों में काम कराना कानूनन जुर्म है। जंगल के एकांत का फायदा उठाकर मासूमों के भविष्य और सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है, जिस पर जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
मानकों और नियमों की खुली अनदेखी
किसी भी प्रकार की ज्वलनशील या निर्माण इकाई के संचालन के लिए कड़े प्रशासनिक मानक तय हैं, जिनमें:
* विस्फोटक विभाग और जिला प्रशासन से विधिवत लाइसेंस व अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC),
* अग्निशमन विभाग (Fire Department) की जांच, पर्याप्त अग्निशामक यंत्र और आपातकालीन निकास व्यवस्था,
* वन क्षेत्र और पर्यावरण नियमों के तहत सुरक्षित दूरी का निर्धारण,
* श्रम विभाग में श्रमिकों का औपचारिक पंजीकरण और अनिवार्य सुरक्षा उपकरण शामिल हैं।
सूत्रों का कहना है कि जंगल के इस सुनसान परिसर में सुरक्षा के न्यूनतम इंतजाम भी दूर-दूर तक दिखाई नहीं दिए। न तो आग से निपटने के पुख्ता साधन थे और न ही कोई आधिकारिक अनुमति का बोर्ड।
जंगल में भड़की चिंगारी तो कौन होगा जिम्मेदार?
जंगल क्षेत्र में सूखे पत्ते और लकड़ियां आग को तेजी से फैलाने का काम करती हैं। यदि बारूद या ज्वलनशील पदार्थों के अवैध भंडारण के चलते कोई अनहोनी घटती है, तो आग पूरे जंगल को अपनी चपेट में ले सकती है। स्थानीय जागरूक लोगों का कहना है कि जंगलों की आड़ में चल रहे इस संदिग्ध धंधे पर यदि समय रहते नकेल नहीं कसी गई, तो यह किसी बड़े हादसे और वन संपदा के नुकसान को न्योता दे सकता है।
अब देखना यह है कि पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग इस संदिग्ध गतिविधि की मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच करते हैं या फिर मामला यूं ही अनसुना रह जाएगा।
