ग्रामीण तहकीकात
मंगलौर। सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक डिजिटल वेब पोर्टल के प्रचार बैनर को लेकर गंभीर विधिक सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल प्रचार सामग्री में निजी पोर्टल के साथ भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) का चित्रांकन किए जाने और लंबित आवेदन संख्या दर्शाए जाने का मामला सामने आया है। पत्रकारों के शीर्ष संगठन मंगलौर प्रेस क्लब (पंजीकृत) ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए इसे नियमों का उल्लंघन करार दिया है और शासन-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर विधिक कार्रवाई की मांग की है।

वायरल हो रहे Need24.digital के डिजिटल बैनर में एक ओर भारत का राष्ट्रीय प्रतीक दर्शाया गया है, तो वहीं दूसरी ओर ‘PRGI APPLICATION UNDER PROCESS‘ अंकित कर एक आवेदन संख्या का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही इसे ‘डिजिटल ई-पेपर‘ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
मंगलौर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (PRGI) के अंतर्गत आवेदन का प्रक्रियाधीन होना किसी भी रूप में विधिक पंजीकरण या मान्यता का प्रमाण नहीं होता है। किसी भी डिजिटल पोर्टल या यूट्यूब चैनल को समाचार पत्र (प्रिंट) के समतुल्य बताकर या लंबित आवेदन के आधार पर भ्रम उत्पन्न करना प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण प्रणाली के बुनियादी नियमों के विपरीत प्रतीत होता है।
कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, किसी भी निजी पोर्टल, गैर-सरकारी उपक्रम अथवा व्यापारिक प्रचार सामग्री में अशोक स्तंभ का प्रयोग करना अत्यंत गंभीर विषय है:
– राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005: इस अधिनियम की धारा 3 एवं 4 के अंतर्गत बिना केंद्र सरकार की सक्षम अनुमति के किसी भी व्यापार, व्यवसाय या निजी प्रचार में राष्ट्रीय प्रतीक का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है।
– भ्रामक प्रचार का विषय: आवेदन की स्थिति विचाराधीन होने के बावजूद राष्ट्रीय प्रतीक और अर्ध-शासकीय स्वरूप प्रस्तुत कर जनता एवं प्रशासनिक मशीनरी में भ्रम पैदा करना कानून की दृष्टि से संदेहास्पद है।
मंगलौर प्रेस क्लब ने दो टूक कहा कि पत्रकारिता के नाम पर नियमों को ताक पर रखने और अनधिकृत तरीकों से जनता को गुमराह करने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारिता को संरक्षण देना तथा गैर-कानूनी ढंग से संचालित हो रहे तथाकथित पोर्टलों की जवाबदेही तय कराना प्रेस क्लब की प्राथमिकता है। संगठन ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र प्रेषित कर सोशल मीडिया पर वायरल इस बैनर की सत्यता व वैधानिकता की साइबर सेल से जांच कराने का अनुरोध किया है।
