ग्रामीण तहकीकात विशेष रिपोर्ट
नारसन। ग्रामीण विकास के नाम पर नारसन ब्लॉक में संचालित रीप (REAP) परियोजना में करोड़ों रुपये के सरकारी बजट के वितरण और नियुक्तियों को लेकर चल रही मनमानी का मामला अब राज्य मुख्यालय देहरादून की चौखट पर पहुंच गया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जिला कार्यालय ग्रामोत्थान (रीप), विकास भवन द्वारा जारी पत्रांक 375 में खुद यह स्वीकार किया गया था कि परियोजना में तैनात कार्मिकों के चरित्र एवं पुलिस वेरिफिकेशन संबंधी कोई अभिलेख कार्यालय के पास मौजूद नहीं हैं। इसके साथ ही जब योजना के तहत लाभान्वित महिला समूहों पर दर्शाए गए करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट, वार्षिक बैंक स्टेटमेंट, सीए ऑडिट रिपोर्ट और उपकरणों की खरीद के बिल-वाउचर तलब किए गए, तो जिला परियोजना प्रबंधन ने वित्तीय आंकड़े उपलब्ध कराने के बजाय जिम्मेदारी सहकारिता और एनआरएलएम के पाले में सरका दी। 30 दिन की विहित समय-सीमा बीतने के बाद बैकडेट डालकर बिना सक्षम अधिकारी की मुहर और दस्तखत के अप्रमाणित पन्नों का पुलिंदा भेजे जाने के खिलाफ जब प्रथम अपील दाखिल की गई, तो मुख्य विकास अधिकारी (CDO) हरिद्वार ललित नारायण मिश्र ने मामले की विधिक गंभीरता को देखते हुए पत्रांक 1715 जारी कर पूरी पत्रावली सीधे राज्य परियोजना निदेशक, UGVS-REAP देहरादून को अंतरित कर दी है। सीडीओ ने पत्रावली भेजते हुए अपीलीय प्रार्थना पत्र को निर्धारित अपील पंजिका में दर्ज कर आरटीआई अधिनियम की धारा 19 के तहत समय-सीमा के भीतर विधिक सुनवाई कर निस्तारण करने का अनुरोध किया है। मामला सीधे राज्य मुख्यालय के संज्ञान में आने और उच्च स्तर से विधिक सुनवाई तय होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर लीपापोती में जुटे अफसरों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है।
सरकारी धन की बंदरबांट, बैंक स्टेटमेंट छुपाने और बिना पुलिस वेरिफिकेशन नियुक्तियों से जुड़े इस पूरे कारनामे की विस्तृत खोजी रिपोर्ट ‘दैनिक ग्रामीण तहकीकात’ समाचार पत्र के आगामी अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की जाएगी।
