• आईआईटी मद्रास, बॉम्बे, दिल्ली समेत देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ जुटे
• ग्रामीण कारीगरों व किसानों के लिए टिकाऊ मॉडल पर मंथन

ग्रामीण तहकीकात / नवीन कुमार
रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) में ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG 2.0) की दो दिवसीय तीसरी वार्षिक राष्ट्रीय समीक्षा बैठक का विधिवत शुभारंभ हुआ; बैठक का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में विकसित हो रहे उन्नत अनुसंधान को सीधे जमीनी स्तर पर उतारकर ग्रामीण समुदायों, किसानों और स्थानीय कारीगरों के जीवन में व्यावहारिक व टिकाऊ बदलाव लाना है; उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद ने दो-टूक कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकी का वास्तविक प्रभाव तभी संभव है जब वह वैज्ञानिक नवाचार से आगे बढ़कर वहनीयता, अनुकूलनशीलता और बड़े पैमाने पर अपनाए जाने की क्षमता प्रदर्शित करे; उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अनुसंधान केवल फाइलों तक सीमित न रहकर ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर स्थानीय उद्यम मॉडलों को जन्म दे;
इस अवसर पर प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनई ने शैक्षणिक अनुसंधान और धरातलीय क्रियान्वयन के बीच निर्बाध जुड़ाव की आवश्यकता जताई; उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार की सफलता अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति पर उसके पड़ने वाले ठोस प्रभाव से तय होती है, जिसके लिए निरंतर फीडबैक और मानकीकृत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रोटोकॉल बेहद जरूरी हैं; वहीं आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी तभी सार्थक बनती है जब वह किसानों और शिल्पकारों की वास्तविक जमीनी जरूरतों के अनुरूप हो; उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, सरकार, उद्योगों और एनजीओ के साझा सहयोग से इस मिशन को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया;

बैठक में आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, ICAR-NAARM हैदराबाद तथा SKUAST कश्मीर के RuTAG केंद्रों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं; पहले दिन की चर्चाओं में तकनीकी हस्तांतरण की बाधाओं को दूर करने और ग्रामीण भारत के सतत विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने पर व्यापक मंथन हुआ; इस दौरान आईआईटी रुड़की के डीन (SRIC) प्रो. विवेक मलिक, RuTAG के पीआई प्रो. एस. के. सिंगल तथा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के सलाहकार डॉ. राकेश कौर सहित देश भर के प्रमुख वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
