ग्रामीण तहकीकात समाचार पत्र (संपादक नवीन कुमार)
रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के वार्षिक दीक्षांत समारोह 2026 के पहले दिन देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। युवा इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को प्रेरित करते हुए एनएसए डोभाल ने विश्वास जताया कि आने वाले दो दशकों में भारत की जीडीपी 4,015 अरब डॉलर से छलांग लगाकर 38,000 अरब डॉलर (38 ट्रिलियन डॉलर) के स्तर को छू लेगी।

सभागार में मौजूद उपाधि धारकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर की साक्षी बन रही है, जहां असीम संभावनाएं उनका इंतजार कर रही हैं। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन मूल्यों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को जीवन के हर मोड़ पर निडर और साहसी बने रहने का संदेश दिया। इस विशेष अवसर पर संस्थान ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को देश सेवा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए मानद उपाधि (ऑनोरिस कौसा) से विभूषित किया।
पहले दिन 1,277 स्नातकों को मिली उपाधि, टूटा रिकॉर्ड

दो दिवसीय आयोजन के शुरुआती दिन मुख्य रूप से अंडरग्रेजुएट स्तर के 1,277 विद्यार्थियों को उपाधियां बांटी गईं, जिनमें 1,001 छात्र और 276 छात्राएं शामिल रहीं। इनमें बी.टेक, बी.आर्क, बीएस-एमएस और एकीकृत एम.टेक सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल थे। संस्थान के इतिहास में पहली बार पांच वर्षीय बीएस-एमएस ड्युअल डिग्री भी प्रदान की गई। केमिकल साइंसेज के छात्र श्रीवरदन बालाजी को बीटेक/बीएस समूह में सर्वश्रेष्ठ सीजीपीए अर्जित करने पर प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल’ से नवाजा गया।
आईआईटी रुड़की इस वर्ष अपने इतिहास में सर्वाधिक कुल 2,701 डिग्रियां वितरित कर नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। दूसरे दिन यानी 20 सितंबर को 1,424 पीजी और पीएचडी शोधार्थियों को डिग्रियां दी जाएंगी।
सीडीएस और हरीश साल्वे ने बढ़ाया छात्रों का उत्साह
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और आधुनिक चुनौतियों से निपटने में युवाओं की तकनीकी दक्षता और शोध क्षमताएं सबसे अहम कड़ी हैं।

आईआईटी रुड़की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अध्यक्षता करते हुए विद्यार्थियों के अनुशासन और संस्थान की गौरवशाली विरासत की सराहना की। वहीं, संस्थान के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने सभी उपाधि धारकों को बधाई देते हुए कहा कि आईआईटी रुड़की केवल तकनीकी विशेषज्ञ नहीं, बल्कि गंभीर सोच और नवाचार के दम पर वैश्विक समस्याओं को हल करने वाले नेतृत्वकर्ता तैयार करता है। उपाधि प्राप्त करने के बाद परिसर में छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच खासा उत्साह देखा गया।
